Monday, June 9, 2008

हमसफ़र

कितना प्यारा है यह मेरा हमसफ़र
ज़िन्दगी का सफर सुहाना बना गया
रास्तों के कांटे फूलों से सजा कर
चलने का राह हसीन बना गया

दूर हो कर भी है वोह कितना पास
आंखें की निंदिया चूरा गया
रंगीले सपने दिखा कर
जीवन का मोह दिला गया

कितना करू में और इंतजार
टिक टिक चाले धीरज से यह वक़्त
दिल को और में कितना सहलू
लगे सालो का यह मिलाप

1 comment:

Mixed..Feelings said...

i hope that ur he will come soon after reading this beautiful poem.. i felt like saying Wah ! wah!